वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 162 of 268
वृन्दावन कौ नाम रट, वृन्दावन कौं देखि।
वृन्दावन सौं प्रीत कर, वृन्दावन उर लेखी॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (79)
वृन्दावन का नाम किसे याद होगा? वृन्दावन को कौन देख सकता है? वृन्दावन सौ प्रेम, वृन्दावन उर लेखी.. - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (79)