वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 165 of 268

प्रगट जगत में जगमगै, वृन्दाविपिन अनूप। नैन अछत दीसत नहीं, यह माया कौ रूप॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (83) प्रगट जगत् पुरुष जगमगै, वृन्दाविपिन अनुप। आँखें अच्छी नहीं लगतीं, ये माया क्या रूप है.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (83)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि