वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 166 of 268

वन्दावन कौ जस सुनत, जिनकै नाहिं हुलास। तिनको परस न कीजिये, तजि ध्रुव तिनको पास॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (85) वंदावन को कौन सुनता है, जिसकी कोई खबर नहीं? तिनके को पारस मत बनाओ, स्तम्भ तो तिनका ही है.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (85)
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