वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 167 of 268

भुवन चतुर्दश आदि दै, ह्वै है सबकौ नास। इक छत वृन्दाविपिन घन, सुख कौ सहज निवास॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (86) भुवन चतुर्दश आदि देता है, सब नष्ट हो जाता है। वृन्दावन के घन में एक छत है, जहाँ सुख और आरामदायक निवास है.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (86)
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