वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 173 of 268
जुगल रूप की झलक उर, नैननिं रहै झलकाइ।
ऐसे सुख के रंग में, राखै मनहिं रँगाइ॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (91)
जुगल के रूप की झलक दिख रही है. ऐसी ख़ुशी के रंग में, मैं अपना रंग रखता हूँ... - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (91)