वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 174 of 268
आवै छबि की झलक उर, झलकै नैनन वारि।
चिंतत श्यामल गौर तन, सकहि न तनहिं संभारि॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (92)
यहाँ छवि की एक झलक है, मेरी आँखों की एक झलक है। चिंतत श्यामल गौर तन, सकाहि नहि तनहि संभारी।।- श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (92)