वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 175 of 268

जीरन पट अति दीन लट, हिये सरस अनुराग। विवस सघन बन में फिरै, गावत युगल सुहाग॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृंदावन शत लीला (93) जीरन पट वेरी दीन लाट, हिय सरस अनुराग। घने जंगल में घूमती है जिंदगी, युगल का दाम्पत्य जीवन... - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (93)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिआज सखि निरख रूप भरि नैन