श्री राधावर भज श्री राधावर भजि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 178 of 268

(राग भैरव) श्री राधावर भज श्री राधावर भजि। और सकल धर्मनि कौं तू तजि॥ [1] होइ अनन्य एक रस गाहौ। रसिकनि-संग जु सदा निवाहौ॥ [2] आँन धर्म व्रत नेम न कीजै। जुगल किसोर-चरन चित दीजै॥ [3] श्री वृंदावन घन-कुंज निहारौ। 'हित ध्रुव' तेहि ठाँ वास बिचारौ॥ [4] - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (94) (राग भैरव) श्री राधावर भज श्री राधावर भजी। और पूर्ण धर्मवादी कौन है? [1] होइ और एक रस गहौ। तुम सदैव रसिकनी रहोगी। [2] आहार, धर्म और व्रत का पालन न करें। जुगल किसोरा-चरण चित दीजै..[3] श्री वृन्दावन के घन-कुंज को देखो। 'हित ध्रुव' तेहि थान वास बिछरौ.. [4] - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, पद्यावली (94)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि