वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 179 of 268

ऐसी गति ह्वै है कबहुँ, मुख निसरत नहीं बैन। देखि देखि वृन्दाविपिन, भरि भरि ढ़ारै नैन॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (95) ऐसा आंदोलन कब होता है? चेहरा मिटाया नहीं जाता, न ही उस पर प्रतिबंध लगाया जाता है. वृंदाविपिन की ओर देखो, वह भारी आँखों से भरी है.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (95)
श्री राधावर भज श्री राधावर भजिवृन्दाविपिन प्रणाम करि