वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 180 of 268
वृन्दावन तरु-तरु तरे, ढरै नैन सुख नीर।
चिंतत फिरै आबेस बस, स्यामल-गौर सरीर॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृंदावन शत लीला (96)
वृन्दावन तारों से भरा है, आँखों में खुशी नहीं है। मैं चिंतामुक्त हूं, मेरा शरीर सांवला और गोरा है.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (96)