वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 182 of 268

परम सच्चिदानंद घन, वृन्दाविपिन सुदेस। जामें कबहूँ होत नहिं, माया काल प्रवेस॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृंदावन शत लीला (97) परम सच्चिदानन्द घन, वृन्दाविपिन सुदेस। माया काल कब और कहां प्रवेश कर जाए, ऐसा नहीं होता.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (97)
ऐसौ और सनेही कौनऐसौ और सनेही कौन