वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 193 of 268

वृन्दावन सत जो कहै, सुनि है नीकी भाँति। निसिदिन तेहि उर जगमगै, वृन्दावन की काँति॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (105) वृन्दावन सत जो भी कहता है, मैं उसे कुत्ते की तरह सुनता हूँ। निसिदिन तेहि उर जगमगै, वृन्दावन की कांति.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (105)
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