वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 194 of 268
वृन्दावन को चिन्तवन, यहै दीप उर बार।
कोटि जन्म के तम अघहि, काटि करै उजियार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (106)
वृन्दावन से चिंतावन तक, यह दीप उर बार है। कोटि जन्मों का अंधकार नष्ट हो गया, प्रकाश कट गया.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (106)