वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 196 of 268
प्रेम सिंधु वृन्दाविपिन,जाकौ अन्त न आदि।
जहाँ कलोलत रहत नित, युगल किशोर अनादि॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (109)
प्रेम सिन्धु वृन्दाविपिन, जाकौ अंत ना आदि। जहाँ कलोलत नित्य वास, युगल किशोर शाश्वत... - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (109)