वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 197 of 268
न्यारौ चौदह लोक तें, वृन्दावन निज भौन।
तहाँ न कबहूँ लगत है, महाप्रलय की पौन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (110)
चौदह लोक हैं, निज धाम वृन्दावन। महाप्रलय की चौथी तिमाही कब, कहाँ, कुछ भी ज्ञात नहीं.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (110)