वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 2 of 268
प्रथम नाम हरिवंश हित, रट रसना दिन रैन।
प्रीति रीति तब पाइयै, अरु वृंदावन ऐन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (1)
प्रथम नाम हरिवंश हित, रत रसना दीन रैन। प्रीति रीति तब पयी, अरु वृन्दावन ऐं.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (1)