वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 201 of 268
या मन के अवलंब हित, कीन्हौं आहि उपाय।
वृन्दावन रस कहन में, मति कबहूँ उरझाय॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (114)
या हृदय संबंधी समस्याओं के संभावित समाधान क्या हैं? कहाँ है मन वृन्दावन, कहाँ है मन, कब है शक्ति.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (114)