(सवैया)

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 214 of 268

(सवैया) ऐसी करौ नव लाल रंगीले जू, चित्त न और कहूँ ललचाई। [1] जे दुख सुख रहे लगि देह सौं, ते मिटि जाँई अरु लोक-बड़ाई॥ [2] संगति-साधु वृंदावन कानन, तौ गुन-गाननि माँझ विहाई। [3] छबि-कंज-चरन तिहारे बसौ उर, देहु यहै ‘ध्रुव’ कौं ध्रुवताई॥ [4] - श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, श्रृंगार शत (3.46) (सवैया) ऐसा करो तुम नये लाल रंग के जूते, तुम्हारा मन और कुछ कहने को न ललचाये। [1] If sadness remains happy then my life will be destroyed. [2] Sangati-Sadhu Vrindavan: According to Kanan, you will get married according to merit. [3] Image-Kanj-Charan Tihare Basau Ur, Dehu Yahai 'Dhruv' Kaun Dhruvtai. [4] - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, श्रृंगार शत (3.46)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिसब तें कठिन उपासना, प्रेम-पंथ रस-रीति।