सब तें कठिन उपासना, प्रेम-पंथ रस-रीति।

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 215 of 268

सब तें कठिन उपासना, प्रेम-पंथ रस-रीति। राई सम जो चलै मन, छूटि जाइ 'ध्रुव' प्रीति॥ - श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, श्रृंगार शत (3.51) दस बातें - भक्ति, प्रेम-पंथ, रस-संस्कृति। रै सम जो चलै मन, छुति जा 'ध्रुव' प्रीति.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, शृंगार शत (3.51)
(सवैया)वृन्दाविपिन प्रणाम करि