वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 216 of 268
अद्भुत युगल विहार कौ, जिनकै रहै विचार।
सुनी ध्रुव तिनकी चरण रज, लै लै सिर पर धार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, मन शिक्षा (64)
अद्भुत जोड़े कौन हैं और वे किसके विचार हैं? सुनो ध्रुव, चरणों में तिनका, सिर पर धार.. - श्री ध्रुवदास, बयालाइस लीला, मन शिक्षा (64)