वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 218 of 268

अंग अंग सब लाल के, झुकत प्रिया की ओर। सहज प्रेम कौ ढार परयौ, बँधे नेह की डोर॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (12) शरीर के सारे अंग लाल थे, प्रिया झुकी हुई थी। जो सहज प्रेम का हाथ पकड़ लेता है, वह प्रेम के बंधन में बंध जाता है.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, प्रेमावली (12)
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