वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 219 of 268

अरून नील सित कमल कुल, रहे फूलि बहुरंग। वृंदावन पहिरैं मनौं, बहु विधि वसन सुरंग॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (17) अरुण नील सत कमल कुल, पूर्णतया बहुरंगी। वृन्दावन पहारैं मनौं, बहु विधि वसन सुरंग.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (17)
वृन्दाविपिन प्रणाम करि(कवित्त)