वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 22 of 268

युगल प्रेम रसमाधुरी, तहाँ न अटकै चित्त। चखत फिरै माया फलनि, तहाँ रहै दुःख नित्त॥ - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (10) दम्पति का प्रेम मधुरता से भरा होता है, मन में कोई बेचैनी नहीं होती। संसार में माया अमुक घूमती है, वहां सदा दुःख रहता है.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, ख्याल हुल्लास (10)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिऐसैं हिय में बसत रहौ