वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 226 of 268
दुर्लभ दुर्घट सबनि तैं, वृन्दावन निजु भौन।
नवल राधिका कृपा बिनु, कहिधौं पावै कौन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (05)
दुर्लभ दुर्भाग्य सबके हैं, वृन्दावन मेरे निकट है। नवल राधिका कृपा बिनु, कहिधौं पावै कौन.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (05)