वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 227 of 268
जे सेवत वृन्दाविपिन, युगल कुँवर रस ऐंन।
ते बैकुंठ सुखादि तन, चितवत नहिं भरि नैंन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत (59)
जे सेवत वृन्दाविपिन, युगल कुँवर रस ऐन। ते बैकुंठ सुखादि तन, चितवत नहीं भारी नैन.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, भजन शत (59)