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Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 228 of 268

जीव दशा कछु इक सुनी भाई। हरि जस अमृत तजि विष खाई॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (1) भाई सुनो अपने जीवन का हाल. हरि जस अमृत तजि विष खाइ.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, जीव दशा (1)
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