वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 229 of 268

जिनके है यह प्रेम रस, सोई जानत रीत। जो हारै तो पाईए, नेह खेत में जीत॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (13) जिन लोगों में यह प्रेम रुचि होती है वे हमेशा की तरह सोते हैं। जो हरि तो पै, नेह खेत में जित.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, प्रेमावली (13)
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