वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 238 of 268

नवल-प्रिया छवि बसत रहौ, इहि बिधि नैंननि माहिं। निकसत सघन लतानि ते, धरे कंठ पिय बांहिं॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत (61) नवला-प्रिय छवि जीवित रहो, यही राह नैननानि माहीं। निकसत घने लतानि ते, धरे कंठ पिया बनाही.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, भजन शत (61)
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