वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 239 of 268
नौतन वैस किसोर छबि, बसति है जिहि उर नित्त।
पौगंड बाल लीलादिहु, भावत नहिं तेहि चित्त॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत (59)
नौतन एक किशोर की तरह है, जो जहां है वहीं रहता है। Paughand Bal Liladihu, Bhavat Nahin Tehi Chitta.. - Shri Dhruvdas, Bayalis Leela, Bhajan Shat (59)