वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 240 of 268

पलकनि के जैसें अधिक, पुतरिन सौं अति प्यार। ऐसे लाड़ली लाल के, छिन्न छिन्न चरण सँभार॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, युगल ध्यान (20) मैं पलक को अपनी बेटी से भी ज्यादा प्यार करता हूं।' प्यारे लाल के कटे पैरों का ऐसा है दुलार... - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, युगल ध्यान (20)
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