वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 24 of 268
हेममयी अवनी सहज, रतन खचित बहु रंग।
चित्रित चित्र विचित्र गति, छबि की उठति तरंग॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (11)
हेमामयी अवनि सहज, रतन खचित बहु रंज। चित्रित चित्र की विचित्र गति, छवि की उठती लहर.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (11)