वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 252 of 268
सकल भजन के माहिं है, हित-ध्रुव यह रस सार।
नवल-किसोर सु नव-कुँवरी, करत हैं विपिन-विहार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत (60)
सकल भजन का यही सार है, हित ध्रुव इस सार का सार है। नवला-किशोर सु नव-कुँवारी, दो विपिना-विहार.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, भजन शत (60)