वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 253 of 268
संग सोई जाके मिले, भूलै गृह व्यौहार।
तिहिं छिन आवै हिये में, अद्भुत युगल विहार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, मन शिक्षा (32)
मैं जेक के साथ सोया, अपना पारिवारिक जीवन भूल गया। छीनने वाला यहाँ आया है, अद्भुत जोड़ी यहाँ बसी है... - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, मन शिक्षा (32)