वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 254 of 268

हित ध्रुव यह रस मधुर है, सार कौ सार अगाधा। आवै जबहि हिय में, कृपा करै वल्लभ श्रीराधा॥ - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन कुण्डलियां (13) ध्रुव को मारो यह रस मधुर है, सर कौ सर अपार है। जब भी नर आयें, कृपा करें वल्लभ श्रीराधा.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालाइस लीला, भजन कुंडलियां (13)
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