वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 256 of 268
तजि के वृन्दाविपिन कों, और तीर्थ जे जात।
छाँड़ि विमल चिन्तामणी, कौड़ी कौं ललचात॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (81)
वृन्दाविपिन कोना एवं ताजी तीर्थ स्थल। छंदै विमल चिंतामणि, कौदै कौन लालचत.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (81)