वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 26 of 268

वृन्दावन झलकनि झमक, फूले नैंन निहारि। रवि ससि दुतिधर जहाँ लगि, ते सब डारे वारि॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (12) वृन्दावन जगमगा उठता है, आँसुओं से भरी आँखें चमक उठती हैं। जहां रवि ससि दुतिधर लागी, भये सब भये।।- श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (12)
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