वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 27 of 268
लता लता सब कलपतरु, पारिजात सब फूल।
सहज एक रस रहत हैं, झलकत जमुना कूल॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (14)
लता लता सब कल्पतरु, पारिजात सब फूल। सहज एक रस रहत, झलकत जमुना कुल.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (14)