वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 261 of 268

वृन्दावन इहि विधि बसे, तजि के सब अभिमान। तृण ते नीचौ आप कौं, जाने सोइ जान॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (87) इस विधान का आधार वृन्दावन है तथा समस्त अभिमान का त्याग है। आप तीनों में सबसे छोटा कौन है, इतना कौन जानता है... - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (87)
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