वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 33 of 268
अब तो ऐसी चित्त धरि, जुगल चरन रँग राँचि।
महामाधुरी केलि गुन, छिन छिन गायऽरु नाचि॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (18)
अब रांची में एक ऐसे दिमाग वाला शख्स है, जो अपने पैरों के लिए जुगाड़ का इस्तेमाल करता है. महामाधुरी केली गुन, छिन छिन गयरू नाची.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, ख्याल हुल्लास (18)