वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 37 of 268
नख-सिख मोहनि सोहनी, बारी रति श्री कोटि।
जद्दपि पिय मोहन हुते, रहे चरन तर लोटि॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, रंग हुलास (19)
नखा-सिख मोहनी सोहनी, बैरी रति श्री कोटि। पिया मोहन चाहे कुछ भी हो, चरण तार लोटी रहती है.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, रंज हुलास (19)