वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 38 of 268

सुनि ध्रुव ऐसी चाहियै, छाँड़ि जगत की रीति। जुगल चरन कोमल सुरँग, तिनहीं सौं करि प्रीती॥ - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (19) सुनो ध्रुव ऐसा होना चाहिए, काव्य जगत की रीति। जुगल चरण कोमल सुरंग, तिनहिं सौं कारी प्रीति.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, ख्याल हुल्लास (19)
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