वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 4 of 268
रूप-बेली प्यारी बनी, प्रीतम प्रेम-तमाल।
द्वै मन मिलि एकै भये, श्रीराधावल्लभ लाल॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (3)
रूप-बेलि प्यारी बानी, प्रीतम प्रेम-तमाल। द्वै मन मिलि एक भये, श्रीराधावल्लभ लाल.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, प्रेमावली (3)