वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 42 of 268

विपिन धाम आनंद कौ, चतुरई चित्रित ताहि। मदन केलि संपति सदा, तिहि करि पूरन आहि॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (20) विपीन धाम आनंद कौ, चतुराई चित्रित। मदन केलि स्नैपति सदा, तिहि करि पूरन अहि.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (20)
हौं निज सखियनि की बलिहारीवृन्दाविपिन प्रणाम करि