वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 43 of 268
अब तौ करनी है यहै, वृंदावन करि बास।
जुगल चरन छवि रंग रँगि, सब तें होइ उदास॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (21)
अब यहीं करना है, वृन्दावन में करूंगा। जुगल चरण छवि रंगी रंगी, सब दस होई उदास.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, ख्याल हुल्लास (21)