वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 47 of 268
भजन कुँडलिया में रहौ, पग बाहिर जिनि देहु।
एकै जुगल-किसोर सौं, करि 'ध्रुव' सहज सनेहु॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन कुण्डलियां (22)
भजन कुंडली में रहै, जिनि देहु पग बाहिर। एका जुगला-किशोर सौन, कारी 'ध्रुव' सहज सनेहु.. - श्री हित ध्रुव दास, बयालिस लीला, भजन कुंडलियां (22)