भाँति रँगीली छबीली के संग, छबीलौ बन्यौ छबि की निधि माई। [1]

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 6 of 268

भाँति रँगीली छबीली के संग, छबीलौ बन्यौ छबि की निधि माई। [1] सेज सहानी सुरंग बनी, तिहि ऊपर केलि करैं सुखदाई॥ [2] हिय सौं हिय लाइ रहे लपटाइ, लसै अँग अंग में अंगनि - झाँई। [3] मिलीं 'ध्रुव' द्वै सरिता छबि की, मनौं दीठि तहाँ न कहूँ ठहराई॥ [4] - श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, श्रृंगार शत 3 (4) ऐसी रंगीन छवि से छवि छवियों का खजाना बन जाती है। [1] मेरे बिस्तर में एक सुरंग बन गई है, मैं बस तुम्हें खुश करता हूं.. [2] हाय, मैं तुम्हारा ख्याल रख रहा हूं, मेरे शरीर का हर हिस्सा खुशी से भर गया है। [3] मिलिन 'ध्रुव' द्वै सरिता छवि की, मनौं दिथि तहां न कहुं थारै.. [4] - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, शृंगार शत 3 (4)
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