परम रसिक नागर नवल, और न कछू सुहात।
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 66 of 268
परम रसिक नागर नवल, और न कछू सुहात।
कै भावै छवि देखिबौ, कै सुन्यौ चाहत बात॥
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, आनंद लता (30)
सबसे रमणीय नगर नवल है, इसमें कुछ भी सुखदायक नहीं है। कौन सी सुंदर छवि देखूँ, कौन सुनूँ... - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, आनंद लता (30)