वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 68 of 268

मदन सुधा के रस भरे, फूलि रहे दिन रैंन। चहुँदिसि भ्रमत न तजत छिन, भृंग सखिनि के नैंन॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृंदावन शत लीला (31) आपके दिन आनंद से भरे रहें मदन सुधा। भृंग सखानी के नैन न टूटे सब माया से.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (31)
हौं निज सखियनि की बलिहारीवृन्दाविपिन प्रणाम करि