वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 69 of 268
अनियारे नैन-सर बेध्यौ मन प्रीतम कौ,
विथकित चकित रहत बल-हीने हैं। [1]
काजर की रेख जहाँ रही फबि निसि-रैंन,
तरफि गिरत सखी अंक भरि लीने हैं॥ [2]
रसिक किसोर पिय महा सूर प्रेम रन,
नैननिं ते नैना तौहू न्यारे नहिं कीने हैं। [3]
'हित ध्रुव' प्यारी सुकुमारी रीझि देखै गति,
अति सुकुमार महा प्रेम रंग भीने है॥ [4]
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रिंगार शत 1 (32)
अनियारे नैना-सर बेध्यौ मन प्रीतम कौ, विकट रहत रहत बाला-हिने। [1] काजर की रेख जहां भाभी निसि-रैन है, तरफि गिरत सखी नंबर लादेन लाइन हैं.. [2] रसिक किशोर पिया महा सुर प्रेम रैन, नन्निन ते नैना तोहू न्यारे नहीं केन है। [3] 'हित ध्रुव' प्यारी सुकुमारी रीझि देखी गति, अति सुकुमार महा प्रेम रंग वहीर है.. [4] - श्री ध्रुव दास, बयालिस लीला, श्रृंगार शत 1 (32)