(सुरत - केलि)

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 70 of 268

(सुरत - केलि) भाँति भली नवकुंज विराजत , राधिका वल्लभ लाल बिहारी। [1] प्राननि की मनि प्यारी बिहारिनि, प्यार सौं प्रीतम लै उर धारी॥ [2] ज्यौं छबि - चंद्रिका चंद के अंक में, बाढ़ी महा छबि की उजियारी। [3] सखी चहुँ कोद चकोरी भईं 'ध्रुव', पीवत रूप अनूप सुधा री॥ [4] - श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, श्रृंगार शत 3.2 (सूरत-केली) अति सुन्दर नवकुंज विराजत, राधिका वल्लभ लाल बिहारी। [1] प्राणों की प्रिय बिहारिणी, प्रिय मेरी प्यारी माँ.. [2] ज्यों छवि - चंद्रिका छंद के अंक में महा छवि के प्रकाश पर बधाई। [3] सखी चहुँ कोद चकोरी भैन 'ध्रुव', पीवत रूप अनुप सुधा री.. [4] - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, शृंगार शत 3.2
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि